बैरागी राजा भरी दरबार में रोया क्यूं?


अदभुत आभा, दिव्य ललाट,
वाणी जिनकी सिंहनाद,
राष्ट्र सेवक, श्वान निद्रम, श्रमजीवी,
आस्था, संयम, संस्कृति
के कॉकटेल की फकीरी,
अनायास ही हो गए भावुक क्यूं?

जब किल्लत थी ही नहीं किसी पदार्थ की,
स्वच्छ छवि थी यथार्थ की, 
टूल किट की कल्पना शक्ति से 
शवों ने रचाया स्वांग है, 
मिथ्या है सब,
सत्य है आंकड़े सरकारी, 
तो फिर बैरागी राजा,
भरे दरबार में रोना क्यूं?

फ़्रीवास्तवजी
(फ़्री स्पीच वाले)






 

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